The corona virus also had an impact on the Amazon forest called ‘lung of the earth – विशेष: संक्रमण की दस्तक धरती के फेफड़े तक


कोरोना संकट के दौरान प्रकृति की ओर लौटने जैसी बातें खूब हो रही हैं। पर प्रकृति के धुले-खिले रूप को देखकर लोग भूल गए कि ‘धरती का फेफड़ा’ कहा जाने वाला अमेजन का जंगल न सिर्फ अब भी सुलग रहा है बल्कि कोविड-19 ने वहां भी दस्तक दे दी है।

दरअसल, यह साल ही अमेजन के जैविक अस्तित्व के लिए काफी शोक भरा रहा। इस साल के पहले चार महीनों में अमेजन जैविक क्षेत्र में वनों के विनाश में पिछले साल के मुकाबले 55 फीसद का इजाफा देखा गया। ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोना महामारी से पैदा हुए हालात का फायदा उठा कर बहुत से लोग अवैध तरीके से जंगलों को साफ करने में जुट गए।

वैज्ञानिकों का कहना है कि अमेजन जैविक क्षेत्र को होने वाली क्षति की रफ्तार इतनी तेज है कि जल्द ही हम तबाही के ऐसे मुहाने पर खड़े होंगे, जहां से लौट पाना मुश्किल होगा। जाहिर है कि उस स्थिति तक पहुंचने पर दुनिया की आबोहवा को ताजादम रखने में जो भूमिका अमेजन अभी अदा करता है, वो आगे नहीं कर पाएगा।

अमेजन दुनिया का सबसे बड़ा जैविक क्षेत्र है और यहां दुनिया में सबसे अधिक जैव विविधता पाई जाती है। यहां तीन करोड़ तीस लाख लोग रहते हैं, और ये पेड़-पौधों और जानवरों की हजारों नस्लों का घर है। साफ है कि इतने बड़े जैविक क्षेत्र का तबाह होना एक बड़े प्राकृतिक असंतुलन को जन्म देगा।

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This article was written by kk

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